Labour Minimum Wages Hike 2025
Labour Minimum Wages Hike 2025

Labour Minimum Wages Hike 2025: मजदूरों के लिए राहत भरी खबर न्यूनतम मजदूरी दर में बढ़ोतरी

Labour Minimum Wages Hike 2025: वर्तमान में सोशल मीडिया पर यह खबर बहुत वायरल हो रही है कि अब मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर में बढ़ोतरी की जाएगी एवं आज सुबह-सुबह मैंने अखबार एवं गूगल को खोल तो मुझे सबसे ऊपर यही जानकारी दिखाई दे रही थी कि मजदूरों के लिए मजदूरी दर में बढ़ोतरी करने के लिए सरकार बड़ा फैसला लेने जा रही है।

तो इससे संबंधित संपूर्ण जानकारी बताने जा रहा हूं जिससे आप यह स्पष्ट कर सकेंगे की मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर कब बढ़ेगी इसका क्या असर होगा एवं बढ़ाने का कारण जान सकेंगे।

भारत की आर्थिक प्रगति का सबसे मजबूत आधार मजदूर वर्ग को माना जाता है जो खेतों में काम करने वाले किसान मजदूर हो या फिर निर्माण स्थलों इमारतें बनाने वाले एवं फैक्ट्री में मशीन चलाने वाले मजदूर या फिर दुकानों होटलों एवं छोटे उद्योगों में काम करने वाले सभी श्रमिकों के लिए देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान रहता है।

लेकिन यह सच्चाई वर्षों से मजदूरों के लिए उनकी मेहनत के अनुसार मजदूरी नहीं दी जा रही है जिसके कारण लगातार बढ़ती महंगाई से मजदूरों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जबकि मजदूरों की रफ्तार आगे नहीं बढ़ सकी है एवं लाखों मजदूर परिवारों के लिए रोजमर्रा के खर्च चलाना भी वर्तमान में एक चुनौती बन गई है इसको देखते हुए अब मजदूरों के लिए एक बहुत ही बड़ा कदम उठाया गया है।

न्यूनतम मजदूरी दर बढ़ाने का कारण

पिछले कई वर्षों से जीवन यापन में आने वाली लागत में काफी बड़ा बदला हुआ है जिसमें आटा दाल सब्जी के सिलेंडर बिजली दवाइयां एवं बच्चों की पढ़ाई से संबंधित हर चीज महंगी हो चुकी है ऐसे में मजदूरों के पुराने मजदूरी होने के कारण उन्हें एक सम्मानजनक जीवन यापन करने के लिए काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है एवं निम्न वर्ग के मजदूर तो रोजमर्रा के आवश्यक वस्तुओं को भी नहीं खरीद पा रहा है।

मजदूरी दर कम होने से उसका असर मजदूर तक सीमित न रहकर उसके पूरे परिवार पर होता है एवं बच्चों की पढ़ाई पर सबसे बड़ा असर दिखाई दे रहा है इसको देखते हुए उन पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है एवं सरकार का यह भी मानना है कि अगर मजदूर वर्ग की आमदनी महंगाई के अनुसार नहीं बढ़ती है तो उसे सामाजिक असमानता एवं आर्थिक तनाव भी बढ़ेगा जिससे वह आर्थिक रूप से असंतुलित हो सकता है इसको देखते हुए सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दर को बढ़ाने का फैसला किया है।

2025 में कितनी बढ़ी मजदूरी?

केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 से केंद्रीय क्षेत्र में न्यूनतम दरें बढ़ाईं, महंगाई भत्ता जोड़कर। नई श्रम कोड से असंगठित मजदूरों को प्रतिदिन ₹95 यानी मासिक ₹3000 तक बढ़ोतरी।​​

श्रेणीपुरानी दर (लगभग)नई दर 2025 (उदाहरण) 
अकुशल (दिल्ली)₹17,494/माह₹18,000+
कुशल (दिल्ली)₹21,215/माहबढ़ोतरी के साथ
गैर-कुशल (बिहार/यूपी)₹11,000-12,000/माहफ्लोर वेज से ऊपर
केंद्रीय (अक्टूबर)भिन्नVDA सहित अपडेट 

राज्यवार अलग: राजस्थान में ₹8000 से कम था, अब सुधार। सुप्रीम कोर्ट ने शोषण रोकने पर जोर दिया।

मजदूरी बढ़ने से रोजगार और विकास पर असर

आपके भी मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि मजदूर की बढ़ रही बेरोजगारी दर को बढ़ाने के लिए उनकी मजदूरी दर बढ़ाना आवश्यक है क्योंकि यदि मजदूरी दर कम होगी तो मजदूर वर्ग के श्रमिक लोग काम कम करना चाहेंगे एवं कई अध्यायों एवं अनुभव से यह बात स्पष्ट होती है कि उचित मजदूरी दर नए मिलने से लोगों को कम करने से पीछे हटाती हैं एवं उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिलता है तो बेरोजगार लोग भी काम करने के लिए पीछे हटते हैं।

यदि सरकार न्यूनतम मजदूरी दर में बढ़ोतरी करती है तो निर्माण और विकास कार्यों में तेजी आने की संभावना है क्योंकि मजदूरों को बेहतर भुगतान मिलने पर वह निरंतर काम करते रहेंगे जिससे सड़क आवास एवं अन्य प्रोजेक्ट समय पर पूर्ण हो सकेंगे इसके अलावा मजदूरी दर बढ़ने से स्थानीय बाजारों में खरीदारी बढ़ेगी एवं छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को भी इसका लाभ होगा

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जनवरी 2026 में बढ़ सकती है मजदूरी दर

श्रमिक वर्ग काफी लंबे समय से न्यूनतम मजदूरी दर को बढ़ाने की मांग कर रहा था उनकी मांग को अतिरिक्त सुविधा नहीं दी गई है एवं उनके बुनियादी जरूरत से जुड़ी कई समस्याओं को बताते हुए अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि श्रम विभाग द्वारा नए साल के शुरुआत यानी जनवरी 2026 में नई मजदूरी दर को लागू किया जा सकता है इसके लिए आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है यह केवल संभावित जानकारी है।

मुख्य विशेषताएं

  • भारत में न्यूनतम मजदूरी के लिए “वेतन संहिता, 2019” का क्या अर्थ है।
  • नए महत्वपूर्ण अपडेट: ग्रेच्युटी पात्रता में बदलाव (1 वर्ष), गिग वर्कर की सुरक्षा और महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट के नियम।
  • नए नियमों के तहत न्यूनतम मजदूरी की गणना कैसे करें (जिसमें मूल वेतन, वीडीए, एचआरए जैसे घटक शामिल हैं)।
  • हम 2025-26 तक राज्य, कौशल स्तर और नौकरी की श्रेणी के अनुसार न्यूनतम मजदूरी दरों का विश्लेषण करेंगे।
  • 21 नवंबर 2025 से कौन से नए भारतीय श्रम कानून लागू हो रहे हैं, जो सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की गारंटी देते हैं और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित एक वैधानिक “न्यूनतम मजदूरी” का प्रावधान करते हैं।
  • कानून का पालन न करने पर लगने वाले प्रमुख अनुपालन संबंधी नियम और दंड।

नया कानूनी ढांचा: वेतन संहिता, 2019 (नवंबर 2025 से प्रभावी)

अब से प्रभावी प्रमुख प्रावधान:

  • वेतन की नई परिभाषा (50% नियम): वेतन में अब मूल वेतन, महंगाई भत्ता और प्रतिधारण भत्ता शामिल हैं। ये तीनों घटक कर्मचारी की कुल कंपनी लागत (सीटीसी) का कम से कम 50% होने चाहिए। यदि ये 50% से कम हैं, तो गणना के लिए अतिरिक्त भत्तों को वेतन में वापस जोड़ दिया जाता है (जैसे पीएफ और ग्रेच्युटी)।
  • राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन: केंद्र सरकार न्यूनतम जीवन स्तर के आधार पर न्यूनतम वेतन निर्धारित करती है। कोई भी राज्य सरकार इस न्यूनतम वेतन से कम वेतन निर्धारित नहीं कर सकती।
  • लिंग के आधार पर भेदभाव निषेध: यह संहिता वेतन और भर्ती के मामलों में लिंग के आधार पर भेदभाव को सख्ती से प्रतिबंधित करती है।
  • समय पर भुगतान: अधिकांश प्रतिष्ठानों में वेतन का भुगतान अगले महीने की 7 तारीख तक किया जाना चाहिए।
  • भुगतान के तरीके: वेतन का भुगतान सिक्कों, करेंसी नोटों, चेक के माध्यम से किया जाना चाहिए या सीधे बैंक खाते में जमा किया जाना चाहिए (डिजिटल माध्यम को प्राथमिकता दी जाती है)।
  • बोनस पात्रता: संहिता के अनुसार पात्र कर्मचारियों के लिए वार्षिक बोनस (वेतन का न्यूनतम 8.33%) का भुगतान अनिवार्य है।
  • निश्चित अवधि के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी: निश्चित अवधि के कर्मचारी अब केवल 1 वर्ष की सेवा के बाद ग्रेच्युटी के पात्र हैं (पहले यह अवधि 5 वर्ष थी)।
  • गिग वर्कर का योगदान: एग्रीगेटर (डिलीवरी/राइड ऐप) को अब अपने वार्षिक टर्नओवर का 1-2% सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान देना होगा।
  • निःशुल्क स्वास्थ्य जांच: नियोक्ताओं को 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच की सुविधा प्रदान करनी होगी।
  • रात्रिकालीन शिफ्टों में महिलाएं: सुरक्षा की गारंटी और सहमति के साथ, महिलाओं को अब कानूनी रूप से सभी क्षेत्रों में रात्रिकालीन शिफ्टों (शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक) में काम करने की अनुमति है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1) भारत में न्यूनतम मजदूरी को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?

  • इन कारकों में राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन, राज्य/क्षेत्र का विकास स्तर, उद्योग, कौशल स्तर और जीवन निर्वाह लागत सूचकांक (सीपीआई) शामिल हैं।

2) भारत में न्यूनतम मजदूरी में कितनी बार संशोधन किया जाता है?

  • न्यूनतम मजदूरी (VDA) में मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए आमतौर पर साल में दो बार (अप्रैल और अक्टूबर में) संशोधन किया जाता है। इसकी मूल संरचना की समीक्षा कम से कम हर पांच साल में की जाती है।

3) भारत में न्यूनतम मजदूरी 26 दिन है या 30 दिन?

  • हालांकि वेतन को अक्सर “मासिक” राशि के रूप में बताया जाता है, लेकिन दैनिक दर की गणना आमतौर पर मासिक दर को 26 दिनों (एक साप्ताहिक अवकाश को ध्यान में रखते हुए) से विभाजित करके की जाती है। हालांकि, वेतन पूरे महीने के लिए दिया जाता है।

4) भारत में किस राज्य में न्यूनतम मजदूरी सबसे अधिक है?

  • दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी सबसे अधिक है, जो 17,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये प्रति माह तक है।

5) न्यूनतम मजदूरी का भुगतान न करने वाली कंपनियों के लिए क्या दंड हैं?

  • वेतन संहिता के तहत, पहले अपराध के लिए जुर्माना 50,000 रुपये तक हो सकता है और बार-बार अपराध करने पर कारावास की सजा भी हो सकती है।

6) भारत में न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए कौन जिम्मेदार है?

  • राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है। राज्य सरकारें अपनी दरें स्वयं निर्धारित करती हैं, बशर्ते वे केंद्रीय न्यूनतम मजदूरी से कम न हों।

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