नीचे “Haryana Ek Musht Nipatan Yojana 2025” (One Time Settlement Scheme-2025) की पूरी जानकारी दी जा रही है — लाभ, पात्रता, शर्तें, प्रक्रिया और समयसीमा सहित:
हरियाणा सरकार ने छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को आर्थिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से “हरियाणा एकमुश्त निपटान योजना 2025” (Haryana Ek Musht Nipatan Yojana 2025) की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य व्यापारियों को उनके बकाया कर विवादों से राहत देना और राज्य के व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाना है।
यह योजना विशेष रूप से उन व्यापारियों और उद्यमियों के लिए लाभकारी होगी, जो बकाया कर और जुर्माना के कारण वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
क्या है यह योजना
- यह एक One Time Settlement (OTS) Scheme-2025 है जो हरियाणा सरकार की आबकारी व कराधान विभाग द्वारा लागू की गई है।
- मकसद: पुराने कर-देय बकाया (pre-GST या उससे पहले के अधिनियमों के अधीन) टैक्स, जुर्माना और ब्याज को बंद कराना ताकि छोटे व्यापारी, उद्यमी और करदाता जो बकाया न चुका पाए हों, उन्हें राहत मिल सके।
किन अधिनियमों के तहत यह लागू है
बकाया कर राशि निम्न अधिनियमों के तहत हो सकती है:
- Haryana Value Added Tax Act, 2003
- Central Sales Tax Act, 1956
- Haryana Tax on Luxuries Act, 2007
- Haryana Tax on Entry of Goods into Local Areas Act, 2008
- Haryana Local Area Development Tax Act, 2000
- Haryana General Sales Tax Act, 1973
लाभ एवं रियायतें (Waiver / Discount)
कर-देय राशि, जुर्माना (penalty), और ब्याज (interest) पर निम्न रियायतें दी जाएँगी:
| बकाया राशि की श्रेणी | रियायत / भुगतान की शर्तें |
|---|---|
| ₹ 10 लाख तक | – जुर्माना और ब्याज पूरी तरह माफ – ₹10 लाख तक के बकाया पर ₹1 लाख तक की छूट (rebate) – शेष राशि पर 40% भुगतान करना होगा (i.e. बकाया राशि में से 40%) |
| ₹ 10 लाख से ₹ 10 करोड़ तक | – जुर्माना और ब्याज पूरी तरह माफ – 50% भुगतान करना होगा बकाया राशि का |
| ₹ 10 करोड़ से ऊपर | – कोई छूट नहीं (rebate नहीं) – परंतु ब्याज और जुर्माना माफ होंगे; सिर्फ मूल कर राशि (principal) अदा करना होगा। |
पात्रता (Eligibility)
- राज्य के करदाता जो उपरोक्त अधिनियमों के अंतर्गत बकाया कर, ब्याज और जुर्माना रखते हों, विशेषकर छोटे व्यापारी और उद्यमी।
- बकाया राशि 30 जून 2017 तक निर्धारित quantified dues होनी चाहिए। अर्थात् वह अवधि जिसके लिए कर-ब्याज / जुर्माना निर्धारित हो चुका हो।
- मामला ऐसा नहीं होना चाहिए कि वह अभी कानूनी/आपराधिक आरोपों या गलत रिफंड से जुड़ा हो।
भुगतान विकल्प और अवधि
- योजना 6 महीने की अवधि के लिए खुली थी।
- शुरूआत: आमतौर पर 1 अप्रैल 2025 से
- समाप्ति तिथि: 27 सितम्बर 2025 तक लागू थी।
- ₹ 10 लाख से ऊपर की राशि वाले करदाताओं के लिए दो किस्तों (installments) में भुगतान की सुविधा उपलब्ध थी।
कितने को फायदा हुआ
- अब तक लगभग 97,039 करदाताओं ने इस योजना का लाभ लिया है, और लगभग ₹ 712.88 करोड़ की कर बकाया राशि का निपटान हुआ है।
सीमाएँ / शर्तें (Limitations / Important Conditions)
- यदि बकाया राशि ₹ 10 करोड़ से अधिक हो, तो छूट (rebate) नहीं मिलेगी।
- इस योजना का उद्देश्य पुराने बकाया (quantified dues) है — उन मामलों पर लागू नहीं जहाँ फिलहाल विवाद, न्यायालयी कार्यवाही, या अन्य कानूनी चुनौतियाँ हों।
- आवेदन और भुगतान समय पर करना आवश्यक है; समयसीमा ख़त्म होने पर इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
“हरियाणा एकमुश्त निपटान योजना-2025” या “One Time Settlement Scheme-2025” का सार
इस योजना के माध्यम से छोटे व्यापारी और उद्यमी:
- अपने पुराने कर-बकाया, penalty, interest से राहत पा सकते हैं
- भुगतान का बोझ कम हो जाएगा क्योंकि ब्याज-जुर्माना माफ है और कुछ मामलों में बड़े प्रतिशत में रियायत है
- कानूनी झंझट से बचाव होगा क्योंकि पुराने मामलों को निपटाया जा रहा है
अगर चाहें, तो मैं आपकी ज़िला / व्यवसाय प्रकार के हिसाब से चेक कर सकता हूँ कि आप इस योजना के तहत कितनी राहत पा सकते हैं — करना चाहेंगे?
योजना का अवलोकन (Overview)
| विषय | विवरण |
|---|---|
| नाम | Haryana One Time Settlement Scheme 2025 (हरियाणा एकमुश्त निपटन योजना 2025) |
| लागू तिथि / अवधि | 1 अप्रैल 2025 से 180 दिन (6 महीने) के लिए मान्य |
| समाप्ति तिथि (अंतिम आवेदन) | 27 सितंबर 2025 |
| उद्देश्य | पूर्व-GST (पहले लागू कर कानूनों) के अधीन बकाया कर, जुर्माना और ब्याज को राहत देकर छोटे व्यापारियों / करदाताओं को सहायता करना |
| कौन-से अधिनियमों के तहत | निम्न अधिनियमों (Relevant Acts) के अंतर्गत बकाया करों पर यह योजना लागू है: • Haryana VAT Act, 2003 • Central Sales Tax Act, 1956 • Haryana Tax on Luxuries Act, 2007 • Haryana Entertainment Duty Act, 1955 • Haryana General Sales Tax Act, 1973 • Haryana Local Area Development Tax Act, 2000 • Haryana Tax on Entry of Goods into Local Areas Act, 2008 |
| पात्र अवधि | 30 जून 2017 (उसी या उसके पहले का समय) तक की निर्धारित (quantified) बकाया देय राशि पर यह योजना लागू होती है |
| छूट / रियायतें (Waiver / Relief) | • ब्याज और जुर्माना 100% माफ होंगे (i.e. पूर्ण छुट) • यदि बकाया राशि ₹10 लाख या उससे कम हो: ₹1 लाख की छूट + शेष राशि पर 60% की छूट — अर्थात् भुगतान = 40% की दर से • यदि बकाया राशि ₹10 लाख से ₹10 करोड़ के बीच हो: 50% की रियायत (i.e. कर दायित्व का 50% अदा करना होगा) • यदि बकाया राशि ₹10 करोड़ से अधिक हो: कर राशि (Principal) पूरी तरह अदा करनी होगी (i.e. कर में कोई छूट नहीं), पर ब्याज एवं जुर्माना पूरी तरह माफ होंगे |
| किस्तों की सुविधा | यदि निपटना राशि ₹10 लाख से अधिक हो, तो इसे दो किस्तों में जमा किया जा सकता है: – पहली किश्त: आवेदन के समय (50%) – दूसरी किश्त: प्रावधिक आदेश (interim order) जारी होने के 60 दिन के भीतर शेष राशि → यदि दूसरी किश्त समय पर न दी जाए, तो आवेदन रद्द हो सकता है और पहले जमा राशि अधिनियमों के तहत समायोजित कर ली जाएगी (भविष्य लौटाया नहीं जाएगा) |
| आवेदन माध्यम | ऑनलाइन — हरियाणा टैक्स (Excise & Taxation) विभाग की वेबसाइट पर आवेदन करना है |
| लाभार्थियों की संख्या एवं राशि | अब तक लगभग 97,039 करदाताओं ने इस योजना का लाभ लिया है और लगभग ₹712.88 करोड़ की कर बकाया राशि का निपटान हुआ है |
आवश्यक दस्तावेज़ (Required Documents)
नीचे वे मुख्य दस्तावेज़ दिए हैं जिन्हें आवेदन करते समय संलग्न करना हो सकता है (scheme / विभाग की आवश्यकताओं के अनुसार):
| दस्तावेज़ | उपयोग / महत्व |
|---|---|
| पैन कार्ड / आधार कार्ड | पहचान प्रमाण के रूप में |
| व्यवसाय पंजीकरण / दुकान-व्यापार प्रमाण | व्यवसाय की पहचान |
| कर बकाया की गणना (Assessment Order / Demand Notice) | यह दिखाने के लिए कि कितनी राशि कर, ब्याज, जुर्माना बकाया है |
| विवरण / सूची (Schedule) वर्षवार | जिस वर्षों के लिए बकाया है, उनका विवरण |
| self declaration / घोषणा पत्र | यह घोषणा कि दी गई जानकारी सही है और कोई तथ्य छुपाया नहीं गया है |
| यदि अपील लंबित हो | अपील वापसी का प्रमाण (यदि प्रावधिक आदेश के बाद अपील वापसी होनी हो) |
| किसी भी अन्य प्रमाण | विभाग द्वारा मांगे गए अन्य दस्तावेज़ जैसे पंजीकरण संख्या, पते का प्रमाण आदि |
FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. हरियाणा एकमुश्त निपटान योजना 2025 क्या है?
यह योजना छोटे व्यापारियों को बकाया कर विवादों से राहत देने और जुर्माना/ब्याज में छूट प्रदान करने के लिए शुरू की गई है।
2. इस योजना का लाभ कौन उठा सकता है?
हरियाणा के पंजीकृत छोटे व्यापारी और उद्यमी, जिनके कर विवाद लंबित हैं।
3. आवेदन प्रक्रिया क्या है?
आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकता है।
4. इस योजना में कौन-कौन से दस्तावेज़ आवश्यक हैं?
व्यापार पंजीकरण प्रमाणपत्र, आधार कार्ड/पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण, और बकाया कर विवरण।
5. क्या इस योजना में कोई शुल्क है?
हां, आवेदन के लिए नाममात्र शुल्क का भुगतान करना होगा।

