भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर को संरक्षित करने के उद्देश्य से, संस्कृति मंत्रालय ने ज्ञान भारतम् मिशन (Gyan Bharatam Mission 2025) की शुरुआत की है। यह पहल भारतीय पांडुलिपि धरोहर को डिजिटल रूप में संरक्षित करने और उसे वैश्विक स्तर पर सुलभ बनाने के लिए समर्पित है।
भारत सरकार ने ज्ञान भारतम मिशन 2025 (Gyan Bharatam Mission 2025) की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपियों (manuscripts) का सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और संरक्षण करना है। यह मिशन भारतीय संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके तहत 1 करोड़ से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों को डिजिटली संग्रहीत किया जाएगा।
मिशन का उद्देश्य
- पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण: भारत के विभिन्न संस्थानों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में संग्रहित एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करना।
- राष्ट्रीय डिजिटल भंडार का निर्माण: एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तैयार करना, जहाँ पांडुलिपियाँ सुरक्षित रूप से संग्रहीत और साझा की जा सकें।
- ज्ञान का प्रसार: पांडुलिपियों में निहित विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य, धर्म और संस्कृति के ज्ञान को शोधकर्ताओं और आम जनता तक पहुँचाना।
- संरक्षण और पुनर्स्थापन: पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करना, जैसे 3D इमेजिंग और अन्य तकनीकी उपाय।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
- मिशन की शुरुआत: सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान।
- अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: 11 से 13 सितंबर 2025 तक आयोजित, जिसका उद्देश्य पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर चर्चा करना था।
प्रमुख पहलें
- ज्ञान-सेतु (Gyan-Setu): एक राष्ट्रीय ए.आई. नवाचार चुनौती, जिसमें शोधकर्ताओं और संस्थानों को पांडुलिपि संरक्षण के लिए ए.आई. आधारित समाधान प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
- दिल्ली घोषणा (Delhi Declaration): अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एक साझा संकल्प, जो पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण और प्रचार के लिए प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बजट आवंटन
- कुल बजट: 2024-31 के लिए ₹482.85 करोड़।
- 2025-26 के लिए आवंटन: ₹60 करोड़, जो मिशन की विभिन्न गतिविधियों के लिए निर्धारित किया गया है।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म
मिशन के अंतर्गत एक समर्पित डिजिटल पोर्टल विकसित किया गया है, जो पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, संरक्षण और सार्वजनिक पहुँच को सुनिश्चित करता है। यह पोर्टल शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम जनता के लिए एक सुलभ मंच प्रदान करता है।
मिशन का महत्व
ज्ञान भारतम् मिशन न केवल पांडुलिपियों के संरक्षण का कार्य कर रहा है, बल्कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। यह पहल “विरासत और विकास” के सिद्धांत पर आधारित है, जो भारत की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध बनाने के लिए समर्पित है।
ज्ञान भारतम मिशन का संक्षिप्त विवरण
| विषय | विवरण |
|---|---|
| मिशन का नाम | ज्ञान भारतम मिशन 2025 (Gyan Bharatam Mission 2025) |
| उद्देश्य | भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटलीकरण और संरक्षण के माध्यम से सुरक्षित करना। |
| प्रारंभ | 2025 (सांस्कृतिक मंत्रालय के नेतृत्व में) |
| बजट | कुल ₹482.85 करोड़ (2024-31), 2025-26 के लिए ₹60 करोड़ |
| डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म | राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी – शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए सुलभ डिजिटल भंडार। |
Gyan Bharatam Mission के प्रमुख लाभ
- पांडुलिपियों का संरक्षण – प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियाँ सुरक्षित रहेंगी।
- डिजिटलीकरण – शोध और अध्ययन के लिए आसान पहुँच।
- ज्ञान का प्रसार – विज्ञान, साहित्य, धर्म, चिकित्सा और कला में निहित ज्ञान का वैश्विक स्तर पर साझा करना।
- सांस्कृतिक जागरूकता – भारतीय विरासत और संस्कृति का प्रचार।
- वैज्ञानिक संरक्षण विधियाँ – 3D इमेजिंग, ए.आई. आधारित शोध और अन्य तकनीकी उपाय।
ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत कवर किए जाने वाले विषय
| विषय | विवरण |
|---|---|
| धर्म और दर्शन | प्राचीन ग्रंथ, वेद, उपनिषद, पुराण आदि। |
| विज्ञान और गणित | प्राचीन विज्ञान, ज्योतिष, गणितीय सूत्र, चिकित्सा ग्रंथ। |
| साहित्य | संस्कृत, प्राचीन क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्यिक ग्रंथ। |
| कला और संस्कृति | स्थापत्य, चित्रकला, संगीत और नृत्य संबंधित पांडुलिपियाँ। |
| इतिहास और समाज | ऐतिहासिक अभिलेख, सामाजिक दस्तावेज, यात्रा वृत्तांत। |
राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (National Digital Repository)
- मुख्य उद्देश्य: पांडुलिपियों का केंद्रीकृत डिजिटल भंडार तैयार करना।
- विशेषताएँ:
- सुरक्षित और संरक्षित डिजिटल संग्रह।
- शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए ओपन एक्सेस।
- उच्च गुणवत्ता वाली इमेजिंग और ए.आई. आधारित खोज।
- इंटरैक्टिव पोर्टल में पांडुलिपियों का वर्गीकरण और टैगिंग।
पात्रता मापदंड (Eligibility Criteria)
| पात्रता | विवरण |
|---|---|
| संस्थान | केंद्रीय और राज्य पुस्तकालय, विश्वविद्यालय, शोध संस्थान। |
| व्यक्तिगत संग्रह | प्राचीन पांडुलिपियों का वैध स्वामी/संग्रहकर्ता। |
| सहयोग | मिशन में तकनीकी या शोध सहयोग देने वाले संस्थान और विशेषज्ञ। |
| योगदान | पांडुलिपियों की डिजिटलीकरण, संरक्षण और अनुक्रमण में सहयोग। |
FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: ज्ञान भारतम मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- उत्तर: ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य भारतीय पांडुलिपियों और ज्ञान परंपराओं का संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रचार करना है। इस योजना के तहत दुर्लभ ग्रंथों को संरक्षित कर शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए सुलभ बनाया जाएगा।
प्रश्न 2: इस योजना के तहत कितनी पांडुलिपियों का संरक्षण किया जाएगा?
- उत्तर: इस योजना के अंतर्गत 1 करोड़ से अधिक दुर्लभ और ऐतिहासिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण किया जाएगा, जिससे भारतीय ज्ञान प्रणाली को सुरक्षित रखा जा सके।
प्रश्न 3: क्या आम नागरिक भी इस योजना में भाग ले सकते हैं?
- उत्तर: हां, इस योजना में शोधकर्ता, विद्यार्थी, शिक्षण संस्थान, इतिहासकार, और सांस्कृतिक प्रेमी भाग ले सकते हैं। वे इस परियोजना से जुड़कर अध्ययन और अनुसंधान कर सकते हैं।
प्रश्न 4: इस मिशन के तहत कौन-कौन से ग्रंथ डिजिटाइज़ किए जाएंगे?
- उत्तर: इस योजना के तहत वेद, उपनिषद, पुराण, इतिहास, दर्शनशास्त्र, आयुर्वेद, ज्योतिष, योग, खगोलशास्त्र और अन्य पारंपरिक भारतीय ग्रंथों को डिजिटलीकरण किया जाएगा ताकि इन्हें संरक्षित और प्रचारित किया जा सके।
