Green Panchayat Yojana 2025: हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ‘ग्रीन पंचायत योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना के तहत हिमाचल प्रदेश की 100 पंचायतों में 500-500 किलोवॉट के सोलर ऊर्जा प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे, जिससे गाँवों को न केवल स्वच्छ ऊर्जा मिलेगी बल्कि बिजली की बचत भी होगी।
Green Panchayat Yojana Overview
| योजना का नाम | ग्रीन पंचायत योजना हिमाचल प्रदेश |
|---|---|
| शुरुआत की गई | हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा |
| कुल लाभार्थी पंचायतें | 100 पंचायतें |
| प्रत्येक पंचायत की क्षमता | 500 किलोवॉट के सोलर प्रोजेक्ट |
| उद्देश्य | स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, बिजली खर्च में कमी, पर्यावरण संरक्षण |
| आवेदन प्रक्रिया | राज्य सरकार के माध्यम से (पंचायतों का चयन राज्य द्वारा किया जाएगा) |
योजना का मुख्य उद्देश्य
- प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा से जोड़ना।
- बिजली खर्च में कमी लाकर ग्रामीण पंचायतों का आर्थिक विकास करना।
- पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करते हुए ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना।
प्रमुख फायदे
- पंचायतें खुद बिजली उत्पादन कर सकेंगी और बिजली पर उनकी निर्भरता कम होगी।
- स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
- गाँवों की बिजली संबंधी समस्याएं दूर होंगी।
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योजना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
- कुल पंचायतें: 100
- प्रत्येक पंचायत में लगने वाले सोलर प्रोजेक्ट की क्षमता: 500 किलोवॉट
- योजना का कार्यान्वयन: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा
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इन ग्रीन पंचायतों में सोलर प्लॉट लगाने का कार्य शुरू
योजना के पहले फेस में पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर राज्य की 11 में से 7 पंचायतों को ग्रीन पंचायतों में परिवर्तित करने का काम शुरू हो गया है। इनमें हमीरपुर की करौर, ऊना की कुठार बीट, कांगड़ा की पंजाड़ा और मुहाल, बिलासपुर की लेहड़ी सरेल, सिरमौर की ग्वाली, ठियोग की धरेच पंचायत शामिल है।
इसके अलावा सोलन की ममलीग, जुब्बल कोटखाई की पराली, कुल्लू की बुआई और लाहौल-स्पीति की खांगसर पंचायत में जमीन चिह्नित कर दी गई है और इसी माह टेंडर आवंटित होंगे।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार पंचायतों को हरित पंचायतों में परिवर्तित कर रही है। योजना के तहत पंचायतों में 500 किलोवॉट तक के सोलर प्लांट लगेंगे। सरकार ने दूसरे चरण में प्रदेश की 24 पंचायतों को योजना में शामिल करने को मंजूरी दे दी है।
इसमें विधानसभा क्षेत्र चंबा, भटियात, सुजानपुर, बैजनाथ, ज्वालामुखी, जयसिंहपुर, पालमपुर, शाहपुर, इंदौरा, किन्नौर, शिमला ग्रामीण, ठियोग, रोहड़ू, नाहन, श्री रेणुकाजी, कसौली, दून, अर्की, चिंतपूर्णी और गगरेट की 24 पंचायतें शामिल हैं। हिम ऊर्जा विभाग ने इन पंचायतों को ग्रीन में परिवर्तित करने के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सरकार के मुताबिक हर एक पंचायत में 500 किलोवॉट के सोलर प्लांट स्थापित होंगे। इन परियोजनाओं के चालू होने के बाद पंचायतें बिजली को बेचकर विकास कार्य करवा सकेंगी।
योजना के दूसरे चरण में ग्रीन पंचायतों में परिवर्तित होने वाली पंचायतों में करियन, चलामा, चलोह, साकड़ी, हड़ोली, सोल भुनेर, थालू ऎरला, परगोड, बसंतपुर, चारंग, नेहरा-गनेवग, किरटी पंचायत, सेखल, कौला वाला भूड, संगड़ाह, भारती, कंडोल, नवगांव, धंधड़ी और देवली पंचायत शामिल हैं।
नवंबर 2025 तक सौर परियोजना एजेंसियों को काम पूरा करने का लक्ष्य दिया है। योजना के तहत प्रत्येक सौर परियोजना के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली की खरीद राज्य विद्युत बोर्ड करेगा। कार्यशील होने के बाद प्रत्येक परियोजना से प्रतिदिन लगभग 2250 यूनिट विद्युत उत्पादन और करीब 27 लाख रुपये की आय का अनुमान है। उधर, हिम ऊर्जा के अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत 24 और पंचायतों को ग्रीन पंचायतों में परिवर्तित करने की मंजूरी मिली है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1: ग्रीन पंचायत योजना क्या है?
उत्तर: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण पंचायतों में सोलर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना है।
Q2: योजना के तहत कितनी पंचायतों को लाभ मिलेगा?
उत्तर: योजना के तहत प्रदेश की 100 पंचायतों को लाभ मिलेगा।
Q3: प्रत्येक पंचायत में कितनी क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट स्थापित होंगे?
उत्तर: प्रत्येक पंचायत में 500 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट लगेंगे।
Q4: योजना के मुख्य लाभ क्या हैं?
उत्तर: स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण, बिजली खर्च में कमी।
Q5: योजना का लाभ कौन उठा सकता है?
उत्तर: योजना का लाभ हिमाचल प्रदेश की चयनित पंचायतों को मिलेगा।
